d-block-elements

D block elements तथा D block की व्याख्या करे

d block elements: d-ब्लॉक तत्व या धातुओं को डीब्लॉक एलिमेंट्स (d-block elements) के नाम से भी जाना जाता हैं। यह तत्व द सबसे पश्चिमी उपगुणधारी परमाणु संख्या (atomic number) 21 (स्कांडियम) से 30 (जिंक) तक के होते हैं। इनमें से कई तत्व अनुप्रदेशी एलिमेंट्स (transition elements) भी होते हैं, जो द प्रतीक के बाद की स्थानांतरित परमाणु संख्या के साथ 39 (इरिडियम) से 48 (कैडमियम) तक चलते हैं।

d-ब्लॉक तत्वों का मूल विशेषता यह है कि उनके बाहरी इलेक्ट्रॉन आयामी घनीभूत (n-1)d या आंतरिकी धातुमय बंध (n-1)d आवर्तीय विकर्ण (orbital) में स्थित होते हैं। इसलिए, ये तत्वों को अनुप्रदेशी तत्वों के रूप में भी जाना जाता हैं।

d-ब्लॉक तत्वों की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह हैं कि उनमें बहुतायता में अक्सीजन संयंत्र या ऑक्सिडेशन संयंत्र के प्रकार होते हैं। इन तत्वों के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण हैं जैसे क्रोमियम, मैंगनीज़, आयरन, निकेल, कॉपर, जिंक, सिल्वर, कैडमियम, आदि।

d-ब्लॉक तत्वों का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है जैसे धातुरसायन, उद्योग, उद्योगिक कारख़ानों में मेटल के निर्माण, आर.एंड.डी., इलेक्ट्रॉनिक्स, कीमियाई प्रयोगशाला, आभूषण निर्माण, औद्योगिक पॉलिश, आदि। इन धातुओं की गुणवत्ता, उपयोगिता और विशेषताएं उनमें मौजूद धातु-धातु संयोजन, आपूर्ति श्रृंखला, विद्युत चालकता, धातुमय बंध, आदि से प्रभावित होती हैं।

संक्रमण तत्वों के गुण:  

संक्रमण तत्वों (ट्रांजीशन मेटल्स) के कुछ महत्वपूर्ण गुणों की सूची निम्नलिखित है:

  1. धातुमय बंध: संक्रमण तत्वों में धातुमय बंध होता है, जिसके कारण उनकी मजबूती और द्रव्यता बढ़ती है। यह उन्हें विभिन्न उपयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है, जैसे इंजीनियरिंग उद्योग, निर्माण, उपकरणों का निर्माण, आभूषण निर्माण, आदि।
  2. अणुगठन की विशेषता: संक्रमण तत्वों की विशेषता है कि उनमें अणुगठन की योग्यता होती है। यहां उपयुक्त तरंग आयाम एवं प्रतीक्रियाएं होती हैं, जो उन्हें रसायनिक और विज्ञानिक अध्ययनों के लिए महत्वपूर्ण बनाती हैं।
  3. विद्युत चालकता: संक्रमण तत्वों में विद्युत चालकता होती है। ये धातुओं को अच्छी तरह से विद्युतीय धारा को पार करने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसके कारण, इन्हें विभिन्न विद्युत उपकरणों में उपयोग किया जाता है, जैसे वायर और केबल, ट्रांसफॉर्मर, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
  4. आयामिक रंग: कई संक्रमण तत्व आयामिक रंग (colored) होते हैं और प्रकाश के प्रभाव में अपवर्तन का अध्ययन करने के लिए उपयुक्त होते हैं। इन्हें आभूषण निर्माण, सोने और चांदी के कारख़ानों में उपयोग किया जाता है।
  5. कार्यक्षमता: संक्रमण तत्वों की कार्यक्षमता उच्च होती है, जिसके कारण उन्हें उच्च तापमान, अधिक चिकनाई और धातुरसायनिक प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है।
  6. संयोजन की क्षमता: संक्रमण तत्वों की एक विशेषता है कि वे अन्य धातुओं के साथ आसानी से मिश्रित हो सकते हैं, जिसके कारण विभिन्न मिश्रधातु उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

ये गुण संक्रमण तत्वों को उद्योग, विज्ञान, रसायनिक अध्ययन, औद्योगिक उपकरणों, और अन्य क्षेत्रों में उपयोगी बनाते हैं।

संक्रमण तत्वों की श्रेणी :

संक्रमण तत्वों को आमतौर पर चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. दीपी-ब्लॉक (d-block): यह श्रेणी में 3 धातुओं के समूह के तत्व शामिल होते हैं – ट्रांजिशन एलिमेंट्स, इंनर ट्रांजिशन एलिमेंट्स, और लैंथनाइड और एक्टिनाइड धातुओं के समूह। इनमें समूह 3-12 के तत्व होते हैं और इसलिए इन्हें “डी-ब्लॉक” के रूप में भी जाना जाता है।
  2. इंनर ट्रांजिशन एलिमेंट्स (f-block): यह श्रेणी दो समूहों के तत्वों को सम्मिलित करती है – लैंथनाइड धातुओं का समूह (समूह 57 से 71 तक) और एक्टिनाइड धातुओं का समूह (समूह 89 से 103 तक)। इन तत्वों की विशेषता होती है कि उनके आवर्तीय कोशिकाओं में इंटरनल फिल अपनाने की आवश्यकता होती है।
  3. ट्रांजिशन एलिमेंट्स (अनुप्रदेशी तत्वों के समूह): यह श्रेणी में समूह 3 से 12 तक के तत्व शामिल होते हैं, जिन्हें अनुप्रदेशी तत्व भी कहा जाता है। इन तत्वों की विशेषता होती है कि उनके बाहरी इलेक्ट्रॉन आयामी घनीभूत (n-1)d या आंतरिकी धातुमय बंध (n-1)d विकर्णों में स्थित होते हैं।
  4. पोस्ट-ट्रांजिशन एलिमेंट्स: यह श्रेणी रसायनिक मानकों के अनुसार पहचानी गई है और शामिल होती हैं पदार्थ जैसे आल्यूमिनियम (आम), गैलियम, इंडियम, थॉलियम, टिन, लेड, बिस्मथ, और पोलोनियम आदि। ये पोस्ट-ट्रांजिशन एलिमेंट्स डी-ब्लॉक और फ-ब्लॉक के बीच स्थित होते हैं।

इन श्रेणियों के माध्यम से संक्रमण तत्वों को समूहीकृत किया जाता है, जो उनकी रासायनिक गुणवत्ता, भौतिकी विशेषताएं, और विद्युतीय गुणों के संबंध में मदद करता है।

(i) प्रथम संक्रमण ( 3d श्रेणी ):-

प्रथम संक्रमण (First Transition) श्रेणी उपयुक्त तत्वों का एक संग्रह है, जो d-ब्लॉक के पहले समूह (समूह 3-12) के तत्वों को सम्मिलित करता है। इन तत्वों की परमाणु संख्या n-1 के बाद की स्थानांतरित परमाणु संख्या के साथ 21 से 30 तक होती है। प्रथम संक्रमण तत्वों को आप निम्नलिखित तत्वों के रूप में पहचान सकते हैं:

  • टाइटेनियम (Titanium, परमाणु संख्या 22)
  • वैनेडियम (Vanadium, परमाणु संख्या 23)
  • क्रोमियम (Chromium, परमाणु संख्या 24)
  • मैंगनीज़ (Manganese, परमाणु संख्या 25)
  • फेरोमैगनीज़ (Ferromanganese, परमाणु संख्या 26)
  • कोबाल्ट (Cobalt, परमाणु संख्या 27)
  • निकेल (Nickel, परमाणु संख्या 28)
  • कॉपर (Copper, परमाणु संख्या 29)
  • जिंक (Zinc, परमाणु संख्या 30)

प्रथम संक्रमण तत्वों को उद्योग, विज्ञान, और रसायनिक अध्ययनों में उपयोगी माना जाता है। इनमें कुछ तत्व उदाहरण रूप में आपलोड, स्टेनलेस स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, उद्योगिक उपकरण, और अन्य क्षेत्रों में उपयोग होते हैं।

(ii)  द्वित्य संक्रमण ( 4d श्रेणी ):-

द्वितीय संक्रमण (Second Transition) श्रेणी उपयुक्त तत्वों का एक समूह है, जो d-ब्लॉक के दूसरे समूह (समूह 4-12) के तत्वों को सम्मिलित करता है। इन तत्वों की परमाणु संख्या n-1 के बाद की स्थानांतरित परमाणु संख्या के साथ 39 से 48 तक होती है। द्वितीय संक्रमण तत्वों को आप निम्नलिखित तत्वों के रूप में पहचान सकते हैं:

  • इथ्यूमियम (Yttrium, परमाणु संख्या 39)
  • जिर्कोनियम (Zirconium, परमाणु संख्या 40)
  • नियोबियम (Niobium, परमाणु संख्या 41)
  • मोलिब्डेनम (Molybdenum, परमाणु संख्या 42)
  • टेक्नेशियम (Technetium, परमाणु संख्या 43)
  • रूथेनियम (Ruthenium, परमाणु संख्या 44)
  • रोडियम (Rhodium, परमाणु संख्या 45)
  • पलादियम (Palladium, परमाणु संख्या 46)
  • सिल्वर (Silver, परमाणु संख्या 47)
  • कैडमियम (Cadmium, परमाणु संख्या 48)

द्वितीय संक्रमण तत्वों का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है, जैसे धातुरसायनिक अध्ययन, उद्योगिक उपकरण, केमिकल प्रयोगशाला, आभूषण निर्माण, औद्योगिक पॉलिश, आदि। इन धातुओं की गुणवत्ता, उपयोगिता, और विशेषताएं उन्हें विभिन्न उद्योगों और विज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण बनाती हैं।

(iii) तृतीय संक्रमण ( 5d श्रेणी ):-

तृतीय संक्रमण (Third Transition) श्रेणी उपयुक्त तत्वों का एक समूह है, जो d-ब्लॉक के तीसरे समूह (समूह 4-12) के तत्वों को सम्मिलित करता है। इन तत्वों की परमाणु संख्या n-1 के बाद की स्थानांतरित परमाणु संख्या के साथ 72 से 80 तक होती है। तृतीय संक्रमण तत्वों को आप निम्नलिखित तत्वों के रूप में पहचान सकते हैं:

  • हाफ्नियम (Hafnium, परमाणु संख्या 72)
  • टैंटलम (Tantalum, परमाणु संख्या 73)
  • टंगस्टेन (Tungsten, परमाणु संख्या 74)
  • रीनियम (Rhenium, परमाणु संख्या 75)
  • ऑस्मियम (Osmium, परमाणु संख्या 76)
  • इरिडियम (Iridium, परमाणु संख्या 77)
  • प्लैटिनम (Platinum, परमाणु संख्या 78)
  • गोल्ड (Gold, परमाणु संख्या 79)
  • मर्क्युरी (Mercury, परमाणु संख्या 80)

तृतीय संक्रमण तत्वों का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है, जैसे रसायनिक अध्ययन, आभूषण निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, उद्योगिक उपकरण, और विज्ञानिक अनुसंधान। इन धातुओं की महत्वपूर्ण गुणवत्ता, स्थिरता, विद्युतीय और रसायनिक प्रभाव, और अविलंबितता उन्हें विभिन्न उद्योगों में उपयोगी बनाती हैं।

(iv) चतुर्थ संक्रमण ( 6d श्रेणी ):- 

चतुर्थ संक्रमण (Fourth Transition) श्रेणी उपयुक्त तत्वों का एक समूह है, जो d-ब्लॉक के चौथे समूह (समूह 4-12) के तत्वों को सम्मिलित करता है। इन तत्वों की परमाणु संख्या n-1 के बाद की स्थानांतरित परमाणु संख्या के साथ 104 से 112 तक होती है। चतुर्थ संक्रमण तत्वों को आप निम्नलिखित तत्वों के रूप में पहचान सकते हैं:

  • रुथरफोर्डियम (Rutherfordium, परमाणु संख्या 104)
  • दुब्नियम (Dubnium, परमाणु संख्या 105)
  • सीबोर्गियम (Seaborgium, परमाणु संख्या 106)
  • बोह्रियम (Bohrium, परमाणु संख्या 107)
  • हासियम (Hassium, परमाणु संख्या 108)
  • मैट्नेरियम (Meitnerium, परमाणु संख्या 109)
  • दार्मश्टैडियम (Darmstadtium, परमाणु संख्या 110)
  • रोण्टज़ियम (Roentgenium, परमाणु संख्या 111)
  • कॉपर्निशियम (Copernicium, परमाणु संख्या 112)

चतुर्थ संक्रमण तत्वों के बारे में अधिक जानकारी और उनके विशेषताओं के बारे में अधिक विज्ञानिक अध्ययन जारी है। इन तत्वों के विशेषताएं, रसायनिक प्रभाव, और उपयोगी गुणवत्ता का विस्तृत अध्ययन उन्हें विज्ञानिक अनुसंधान और रसायनिक उपयोगों में उपयोगी बना सकता है।

आयनन एन्थैल्पी :- आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy), जिसे विभिन्न रसायनिक प्रयोगशालाओं में भी आयनन शक्ति के रूप में जाना जाता है, एक रसायनिक प्रक्रिया है जिसमें एक एटॉम या आयन से एक या अधिक इलेक्ट्रॉन को निकाला जाता है। यह शक्ति मापन करती है कि कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए।

एक एटॉम या आयन के आयनन एन्थैल्पी का मापन दो तरीकों से किया जाता है: पहले, पहले आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) कहलाता है और यह उस ऊर्जा को दर्शाता है जिसकी आवश्यकता होती है एक न्यूट्रल एटॉम को एक आयन में बदलने के लिए। दूसरे, द्वितीय आयनन एन्थैल्पी (Second Ionization Enthalpy) कहलाता है और यह उस ऊर्जा को दर्शाता है जिसकी आवश्यकता होती है एक पहले से आयनित आयन को एक और इलेक्ट्रॉन से आयनित करने के लिए। इसी तरह, तृतीय, चतुर्थ, पांचवां आयनन एन्थैल्पी आदि भी मापी जा सकती हैं, जिसमें पहले से आयनित आयन को अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों से आयनित करने की आवश्यकता होती है।

आयनन एन्थैल्पी एक महत्वपूर्ण मापन है, क्योंकि यह दिखाता है कि एक आयन कितना स्थिर है और कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है इसे आयनित करने के लिए। इसका अध्ययन रासायनिक और फिजिकल विज्ञान में महत्वपूर्ण है और उपयोगी जानकारी प्रदान करता है अणु और आयनों की प्रकृति, रासायनिक प्रतिक्रियाओं, और अवसरों के बारे में।

d  block elements की स्थिति :

d-ब्लॉक तत्वों की स्थिति रासायनिक आवर्त श्रेणी के अंतर्गत होती है, जो भारी तत्वों को सम्मिलित करती है। यह समूह 3 के बादी और समूह 12 के पहले आता है। d-ब्लॉक में स्थित तत्वों की परमाणु संख्या n-1 के बादी होती है और इनके बाहरी इलेक्ट्रॉन आयामी घनीभूत (n-1)d विकरणों में स्थित होते हैं।

ये तत्व धातुओं के बड़े और भारी होते हैं, जिनमें आयनन शक्ति और धातुरसायनिक गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। इन धातुओं में बाधार्य, परमाणु राय, तरंग-अवरोही स्पर्श, रंगीनता, माध्यमीय विद्युतीय चालकता, धातुरसायनिक प्रतिक्रियाएं, और धातुगत यौगिकों के साथ अवयवीय अवयवों की गुणवत्ता में विशेष योगदान होता है। इन धातुओं का उपयोग उद्योग, रसायन और कार्याशाला, इलेक्ट्रॉनिक्स, उर्वरक निर्माण, धातुरसायनिक अध्ययन और विज्ञानिक अनुसंधान में होता है।

चुम्बकीय गुण: 

चुंबकीय गुण (Magnetic properties) धातुओं और अन्य पदार्थों की विशेषताओं में से एक होता है जो उनकी चुंबकीय प्रतिक्रियाओं और आपसी प्रभाव को वर्णित करता है। चुंबकीय गुण एक पदार्थ की अवयवीय विद्युतीय संरचना के परिणामस्वरूप होते हैं। यह गुण उन पदार्थों में पाया जाता है जिनमें विद्युतीय अभिक्रियाएं चुंबकीयता प्रदर्शित करती हैं या जिनके अणुओं में अद्यतित विद्युतचुंबकीय मोमेंट होता है।

चुंबकीय गुणों को मुख्य रूप से तीन विभाजित किया जाता है:

  1. दियमग्नेटिज़म: ये पदार्थ दियमग्नेटिक होते हैं जब उनके अणुओं में कोई विद्युतचुंबकीय मोमेंट नहीं होता है। इसलिए, इन पदार्थों को बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में लगाने पर उनमें कोई प्रभाव नहीं होता है। उदाहरण के रूप में, सोना, चांदी, तांबा और धातुओं के बहुत सारे अयासी पदार्थ दियमग्नेटिक होते हैं।
  2. पैरामग्नेटिज़म: इन पदार्थों में अणुओं के विद्युतचुंबकीय मोमेंट पाया जाता है, लेकिन वे धीमे मात्रा में विद्युतचुंबकीयता प्रदर्शित करते हैं। इन पदार्थों के परमाणुओं की चुंबकीय मोमेंट बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में अलग किए जा सकते हैं। उदाहरण के रूप में, ऑक्सीजन और वनस्पति के हरे भाग में मौजूद विद्युतचुंबकीयता पैरामग्नेटिज़म के उदाहरण हैं।
  3. फेरोमग्नेटिज़म: ये पदार्थ फेरोमग्नेटिक होते हैं जब उनके अणुओं में विद्युतचुंबकीय मोमेंट पाया जाता है और इसे उच्च स्तर पर प्रदर्शित किया जाता है। ये पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र में आसानी से प्रभावित होते हैं और मौजूदा चुंबकों के साथ आपसी प्रभाव करते हैं। उदाहरण के रूप में, विभिन्न धातुओं और उनके यौगिकों में फेरोमग्नेटिज़म पाया जाता है। इसमें आयरन (Iron), निकेल (Nickel), कोबाल्ट (Cobalt) आदि शामिल हैं।

चुंबकीय गुण अणुओं के स्वरूप, उनकी आयामी विद्युतीय संरचना और चुंबकीय प्रतिक्रियाओं के आपसी प्रभाव पर निर्भर करते हैं। इसका अध्ययन रसायनिक और भौतिक विज्ञान में महत्वपूर्ण है और उपयोगी जानकारी प्रदान करता है चुंबकीय सामग्री, उपकरण, और विज्ञानिक अनुसंधान में।

परमाणु या आयनन त्रिज्या : 

परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) या आयामी या आयनन त्रिज्या एक विज्ञानिक प्रमाण है जो एक परमाणु के आयाम को मापता है। यह त्रिज्या एक परमाणु के नाभिकीय संरचना के केंद्र से उसकी बाहरी सतह तक की दूरी को दर्शाती है।

परमाणु त्रिज्या को आमतौर पर पीकोमीटर (picometer) या आंग्स्ट्रॉम (angstrom) में मापा जाता है। परमाणु त्रिज्या का मापन परमाणु संरचना और इलेक्ट्रॉन की स्थिति पर निर्भर करता है। यह परमाणु के पदार्थिक आयाम और इलेक्ट्रॉन के संरचनात्मक आयाम में परिवर्तन के परिणामस्वरूप होता है।

परमाणु त्रिज्या एक महत्वपूर्ण प्रमाण है जो परमाणुओं के स्वरूप, अवयवीय विश्लेषण, रासायनिक प्रतिक्रियाओं, और विद्युतीय और उर्वरकीय गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका अध्ययन रासायनिक, भौतिक, और विद्युतीय विज्ञान में होता है और वैज्ञानिकों को अणु संरचना, रासायनिक प्रक्रियाएं, और उपयोगी यौगिकों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

रंगीन आयनों का बनाना :

रंगीन आयनों को बनाने के लिए विभिन्न तत्वों और यौगिकों का उपयोग किया जाता है। यह रंग तत्वों की प्रतिक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनिक स्तरों के साथ जुड़ा होता है। रंगीन आयनों की प्रमुख स्रोत होती हैंगी एवं अंकेन यौगिकों होते हैं, जो उच्च पदार्थों या पदार्थों में पाये जाते हैं।

यदि हम आयनों के रंग की बात करें, तो आमतौर पर वे यौगिकों या अनुमोड़ित धातुओं में ऊर्जा स्तरों के परिवर्तन के कारण होते हैं। इलेक्ट्रॉनों की स्थिति और ऊर्जा स्तरों के बीच परिवर्तन के कारण, प्रकाश की विभिन्न तत्वों को विभिन्न रंगों में प्रकाशित किया जा सकता है।

कुछ तत्वों और यौगिकों के उदाहरण शामिल हैं:

  1. सोना (Gold): सोने का रंग पीला होता है, जो इसकी विशिष्टता है।
  2. कोबाल्ट (Cobalt): कोबाल्ट यौगिकों का उपयोग करके नीले रंग के आयनों को बनाया जा सकता है।
  3. क्रोम (Chromium): क्रोम आयनों को आह्लाददायक और विभिन्न रंगों में प्रकाशित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  4. ऊदबिंद (Ultramarine): यह एक प्रसिद्ध पीगमेंट है जिसका उपयोग नीले रंग के आयनों को बनाने के लिए किया जाता है।

इस तरह से, विभिन्न तत्वों और यौगिकों का उपयोग करके रंगीन आयनों को बनाया जा सकता है। इसमें अन्य कारकों की भी प्रभावित होती है, जैसे अणु संरचना, इलेक्ट्रॉनिक स्तर, आयनन त्रिज्या, और प्रकाश प्रतिक्रियाओं के प्रकार।

उत्प्रेरकीय गुण : 

उत्प्रेरकीय गुण (Catalytic properties) तत्वों या यौगिकों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है जो उन्हें उत्प्रेरक (catalyst) के रूप में पहचानती है। उत्प्रेरक एक पदार्थ होता है जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं में तत्परता बढ़ाता है, प्रतिक्रिया की गति को वर्धित करता है और प्रतिक्रिया के प्रतिशत को बदलता है बिना स्वयं उपभोग किए जाए।

उत्प्रेरक एक प्रतिक्रिया में शामिल होता है और अपने सामरिकता के कारण रासायनिक प्रतिक्रियाओं की गति को प्रभावित करता है। यह रासायनिक प्रक्रियाओं को त्वरित करके समय, ऊर्जा और संवाहक पदार्थों की आवश्यकता को कम करता है। उत्प्रेरक उपयोग में होने के बावजूद स्वयं प्रतिक्रिया में परिवर्तन नहीं करता है और इसलिए प्रतिक्रिया के अंत में अकार्य होता है।

उत्प्रेरकीय गुण के कुछ उदाहरण हैं:

  1. प्लैटिनम (Platinum): प्लैटिनम एक मशीनिक उत्प्रेरक है और धातुओं के अद्यतितन और इतर-मोलकुलर प्रतिक्रियाओं में उपयोगी होता है।
  2. एंजाइम्स (Enzymes): एंजाइम्स जीवाणुओं द्वारा उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होते हैं और जीवित प्रक्रियाओं को संभव बनाने में मदद करते हैं।
  3. वाणिज्यिक उत्प्रेरक: बाजार में विभिन्न उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाले वाणिज्यिक उत्प्रेरक शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, नित्रोजन गैस को अमोनिया के निर्माण में उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

उत्प्रेरकीय गुण अध्ययन रसायनिक विज्ञान, उद्योग, और विज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण हैं। यह हमें बेहतर रसायनिक प्रक्रियाओं का विकास करने और उत्पादों की उत्पादन में कारगरता बढ़ाने में मदद करता है।

D BLOCK एलिमेंट्स तत्वों  को  संक्रमण  तत्व  क्यों  कहाँ  जाता  है ?

D-ब्लॉक तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है क्योंकि इन तत्वों के अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन जो परमाणु के n-1d विकरणों में स्थित होते हैं, आसानी से अलग किए जा सकते हैं और उनके यौगिकों के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। यह तत्वों को उत्पादन, उद्योग, और विज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण बनाता है।

D-ब्लॉक तत्वों का परमाणु क्रमांक 3 के बादी और समूह 12 के पहले होता है। इनमें धातुओं के बड़े संख्यात्मक आयाम और विद्युतीय चालकता होती है। ये तत्व धातुओं के भारी, ट्रांजीशनल और लैंथनॉइड समूहों को सम्मिलित करते हैं। इनमें सोना (Gold), चांदी (Silver), तांबा (Copper), लोहा (Iron), निकेल (Nickel), कोबाल्ट (Cobalt) आदि तत्व शामिल हैं।

इन तत्वों का उपयोग उद्योग, रसायनिक और कार्यशाला, इलेक्ट्रॉनिक्स, उर्वरक निर्माण, धातुरसायनिक अध्ययन और विज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है। इनमें उपयोगी यौगिकों का निर्माण, विद्युतीय चालकता के क्षेत्र में अद्यतन, अणु रासायनिक प्रतिक्रियाओं की अध्ययन, उर्वरकीय उत्पादों के निर्माण, और नए रसायनिक विज्ञानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष : दोस्तों इस ब्लॉग पोस्ट में हमने D block, d block elements ,  संक्रमण तत्वों का गुण, संक्रमण तत्वों की श्रेणी, d block elements की स्थिति, चुम्बकीय गुण, परमाणु एंव आयनन त्रिज्या , रंगीन आयनों का बनाना,

उत्प्रेरकीय गुण , d block elements को संक्रमित तत्व क्यों कहाँ जाता है । इत्यादि के बारे में बताने की कोशिस किये है । यदि इस पोस्ट को पढ़ने पर किसी भी प्रकार की क्वेश्चन बनती है । निसंकोच हमसे कमेंट के माध्यम से संपर्क करे । उसका रिप्लाई हम बहुत ही कम समय में देने की कोशिस करेंगे ।

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